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सोमवार, 21 नवंबर 2011

दीपावली के लिए एक बेहतरीन वेबसाईट




दिवाली बहुत करीब है तो आज की पोस्ट में मैं आपको ऐसी साईट के बारे में बता रहा हु जहा से आपको दिवाली से जुडी हर बात का पता चलेगा वो भी हिंदी में उसी साईट से कॉपी करके मैं दीपावली के पूजन की विधि भी दे रहा हु इस साईट पर आपको दीपावली पूजन सामग्रीलक्ष्मीजी की आरतीमहालक्ष्मी पूजन मुहूर्त,लक्ष्मी पूजा का स्थान ईशान कोणवास्तु सम्मत लक्ष्मी पूजन , धनतेरसप्रदोष-लक्ष्मी-पूजन

इस साईट पर आपको और भी बहुत कुछ मिलेगा एक बार जा कर जरुर देखे इस साईट पर जाने के लिए यहाँ क्लीक करे 
कहा जाता है कि कार्तिक अमावस्या को भगवान रामचन्द्र जी चौदह वर्ष का बनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। अयोध्या वासियों ने श्री रामचन्द्र के लौटने की खुशी में दीप जलाकर खुशियाँ मनायी थीं, इसी याद में आज तक दीपावली पर दीपक जलाए जाते हैं और कहते हैं कि इसी दिन महाराजा विक्रमादित्य का राजतिलक भी हुआ था। आज के दिन व्यापारी अपने बही खाते बदलते है तथा लाभ हानि का ब्यौरा तैयार करते हैं। दीपावली पर जुआ खेलने की भी प्रथा हैं। इसका प्रधान लक्ष्य वर्ष भर में भाग्य की परीक्षा करना है। लोग जुआ खेलकर यह पता लगाते हैं कि उनका पूरा साल कैसा रहेगा।

पूजन विधानः दीपावली पर माँ लक्ष्मी व गणेश के साथ सरस्वती मैया की भी पूजा की जाती है। भारत मे दीपावली परम्प रम्पराओं का त्यौंहार है। पूरी परम्परा व श्रद्धा के साथ दीपावली का पूजन किया जाता है। इस दिन लक्ष्मी पूजन में माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र की पूजा की जाती है। इसी तरह लक्ष्मी जी का पाना भी बाजार में मिलता है जिसकी परम्परागत पूजा की जानी अनिवार्य है। गणेश पूजन के बिना कोई भी पूजन अधूरा होता है इसलिए लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन भी किया जाता है। सरस्वती की पूजा का कारण यह है कि धन व सिद्धि के साथ ज्ञान भी पूजनीय है इसलिए ज्ञान की पूजा के लिए माँ सरस्वती की पूजा की जाती है।

इस दिन धन व लक्ष्मी की पूजा के रूप में लोग लक्ष्मी पूजा में नोटों की गड्डी व चाँदी के सिक्के भी रखते हैं। इस दिन रंगोली सजाकर माँ लक्ष्मी को खुश किया जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर, इन्द्र देव तथा समस्त मनोरथों को पूरा करने वाले विष्णु भगवान की भी पूजा की जाती है। तथा रंगोली सफेद व लाल मिट्टी से बनाकर व रंग बिरंगे रंगों से सजाकर बनाई जाती है।

विधिः दीपावली के दिन दीपकों की पूजा का विशेष महत्व हैं। इसके लिए दो थालों में दीपक रखें। छः चौमुखे दीपक दोनो थालों में रखें। छब्बीस छोटे दीपक भी दोनो थालों में सजायें। इन सब दीपको को प्रज्जवलित करके जल, रोली, खील बताशे, चावल, गुड, अबीर, गुलाल, धूप, आदि से पूजन करें और टीका लगावें। व्यापारी लोग दुकान की गद्दी पर गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा रखकर पूजा करें। इसके बाद घर आकर पूजन करें। पहले पुरूष फिर स्त्रियाँ पूजन करें। स्त्रियाँ चावलों का बायना निकालकर कर उस रूपये रखकर अपनी सास के चरण स्पर्श करके उन्हें दे दें तथा आशीवार्द प्राप्त करें। पूजा करने के बाद दीपकों को घर में जगह-जगह पर रखें। एक चौमुखा, छः छोटे दीपक गणेश लक्ष्मीजी के पास रख दें। चौमुखा दीपक का काजल सब बडे बुढे बच्चे अपनी आँखो में डालें।



दीपावली पूजन कैसे करें



प्रातः स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

अब निम्न संकल्प से दिनभर उपवास रहें-

मम सर्वापच्छांतिपूर्वकदीर्घायुष्यबलपुष्टिनैरुज्यादि-


सकलशुभफल प्राप्त्यर्थं


गजतुरगरथराज्यैश्वर्यादिसकलसम्पदामुत्तरोत्तराभिवृद्ध्‌यर्थं


इंद्रकुबेरसहितश्रीलक्ष्मीपूजनं करिष्ये।



संध्या के समय पुनः स्नान करें।

लक्ष्मीजी के स्वागत की तैयारी में घर की सफाई करके दीवार को चूने अथवा गेरू से पोतकर लक्ष्मीजी का चित्र बनाएं। (लक्ष्मीजी का छायाचित्र भी लगाया जा सकता है।)

भोजन में स्वादिष्ट व्यंजन, कदली फल, पापड़ तथा अनेक प्रकार की मिठाइयाँ बनाएं।

लक्ष्मीजी के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर मौली बाँधें।

इस पर गणेशजी की मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें।

फिर गणेशजी को तिलक कर पूजा करें।

अब चौकी पर छः चौमुखे व 26 छोटे दीपक रखें।

इनमें तेल-बत्ती डालकर जलाएं।

फिर जल, मौली, चावल, फल, गुढ़, अबीर, गुलाल, धूप आदि से विधिवत पूजन करें।

पूजा पहले पुरुष तथा बाद में स्त्रियां करें।

पूजा के बाद एक-एक दीपक घर के कोनों में जलाकर रखें।

एक छोटा तथा एक चौमुखा दीपक रखकर निम्न मंत्र से लक्ष्मीजी का पूजन करें-



नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरेः प्रिया।


या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात॥



इस मंत्र से इंद्र का ध्यान करें-

ऐरावतसमारूढो वज्रहस्तो महाबलः।


शतयज्ञाधिपो देवस्तमा इंद्राय ते नमः॥



इस मंत्र से कुबेर का ध्यान करें-

धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च।


भवंतु त्वत्प्रसादान्मे धनधान्यादिसम्पदः॥



इस पूजन के पश्चात तिजोरी में गणेशजी तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति रखकर विधिवत पूजा करें।

तत्पश्चात इच्छानुसार घर की बहू-बेटियों को आशीष और उपहार दें।

लक्ष्मी पूजन रात के बारह बजे करने का विशेष महत्व है।

इसके लिए एक पाट पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर एक जोड़ी लक्ष्मी तथा गणेशजी की मूर्ति रखें। समीप ही एक सौ एक रुपए, सवा सेर चावल, गुढ़, चार केले, मूली, हरी ग्वार की फली तथा पाँच लड्डू रखकर लक्ष्मी-गणेश का पूजन करें।

उन्हें लड्डुओं से भोग लगाएँ।

दीपकों का काजल सभी स्त्री-पुरुष आँखों में लगाएं।

फिर रात्रि जागरण कर गोपाल सहस्रनाम पाठ करें।

इस दिन घर में बिल्ली आए तो उसे भगाएँ नहीं।

बड़े-बुजुर्गों के चरणों की वंदना करें।

व्यावसायिक प्रतिष्ठान, गद्दी की भी विधिपूर्वक पूजा करें।

रात को बारह बजे दीपावली पूजन के उपरान्त चूने या गेरू में रुई भिगोकर चक्की, चूल्हा, सिल्ल, लोढ़ा तथा छाज (सूप) पर कंकू से तिलक करें। (हालांकि आजकल घरों मे ये सभी चीजें मौजूद नहीं है लेकिन भारत के गाँवों में और छोटे कस्बों में आज भी इन सभी चीजों का विशेष महत्व है क्योंकि जीवन और भोजन का आधार ये ही हैं)

दूसरे दिन प्रातःकाल चार बजे उठकर पुराने छाज में कूड़ा रखकर उसे दूर फेंकने के लिए ले जाते समय कहें 'लक्ष्मी-लक्ष्मी आओ, दरिद्र-दरिद्र जाओ'।

लक्ष्मी पूजन के बाद अपने घर के तुलसी के गमले में, पौधों के गमलों में घर के आसपास मौजूद पेड़ के पास दीपक रखें और अपने पड़ोसियों के घर भी दीपक रखकर आएं।



मंत्र-पुष्पांजलि :

( अपने हाथों में पुष्प लेकर निम्न मंत्रों को बोलें) :-

ॐ यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन्‌ ।


तेह नाकं महिमानः सचन्त यत्र पूर्वे साध्याः सन्ति देवाः ॥


ॐ राजाधिराजाय प्रसह्य साहिने नमो वयं वैश्रवणाय कुर्महे ।


स मे कामान्‌ कामकामाय मह्यं कामेश्वरो वैश्रवणो ददातु ॥


कुबेराय वैश्रवणाय महाराजाय नमः ।


ॐ महालक्ष्म्यै नमः, मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि ।

(हाथ में लिए फूल महालक्ष्मी पर चढ़ा दें।)

प्रदक्षिणा करें, साष्टांग प्रणाम करें, अब हाथ जोड़कर निम्न क्षमा प्रार्थना बोलें :-



क्षमा प्रार्थना :

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्‌ ॥


पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि ॥


मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि ।


यत्पूजितं मया देवि परिपूर्ण तदस्तु मे ॥


त्वमेव माता च पिता त्वमेव


त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।


त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव


त्वमेव सर्वम्‌ मम देवदेव ।


पापोऽहं पापकर्माहं पापात्मा पापसम्भवः ।


त्राहि माम्‌ परमेशानि सर्वपापहरा भव ॥


अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया ।


दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि ॥



पूजन समर्पण :

हाथ में जल लेकर निम्न मंत्र बोलें :-

'ॐ अनेन यथाशक्ति अर्चनेन श्री महालक्ष्मीः प्रसीदतुः'

(जल छोड़ दें, प्रणाम करें)



विसर्जन :

अब हाथ में अक्षत लें (गणेश एवं महालक्ष्मी की प्रतिमा को छोड़कर अन्य सभी) प्रतिष्ठित देवताओं को अक्षत छोड़ते हुए निम्न मंत्र से विसर्जन कर्म करें :-



यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्‌ ।


इष्टकामसमृद्धयर्थं पुनर्अपि पुनरागमनाय च ॥






ॐ आनंद ! ॐ आनंद !! ॐ आनंद !!!

लक्ष्मीजी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।


तुमको निसदिन सेवत हर-विष्णु-धाता ॥ॐ जय...


उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता ।


सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ॐ जय...


तुम पाताल-निरंजनि, सुख-सम्पत्ति-दाता ।


जोकोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता ॥ॐ जय...


तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता ।


कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॥ॐ जय...


जिस घर तुम रहती, तहँ सब सद्गुण आता ।


सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता ॥ॐ जय...


तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता ।


खान-पान का वैभव सब तुमसे आता ॥ॐ जय...


शुभ-गुण-मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता ।


रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता ॥ॐ जय...


महालक्ष्मीजी की आरती, जो कई नर गाता ।


उर आनन्द समाता, पाप शमन हो जाता ॥ॐ जय...

(आरती करके शीतलीकरण हेतु जल छोड़ें एवं स्वयं आरती लें, पूजा में सम्मिलित सभी लोगों को आरती दें फिर हाथ धो लें।)

परमात्मा की पूजा में सबसे ज्यादा महत्व है भाव का, किसी भी शास्त्र या धार्मिक पुस्तक में पूजा के साथ धन-संपत्ति को नहीं जो़ड़ा गया है। इस श्लोक में पूजा के महत्व को दर्शाया गया है-

'पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।


तदहं भक्त्यु पहृतमश्नामि प्रयतात्मनः॥'

पूज्य पांडुरंग शास्त्री अठवलेजी महाराज ने इस श्लोक की व्याख्या इस तरह से की है

'पत्र, पुष्प, फल या जल जो मुझे (ईश्वर को) भक्तिपूर्वक अर्पण करता है, उस शुद्ध चित्त वाले भक्त के अर्पण किए हुए पदार्थ को मैं ग्रहण करता हूँ।'

भावना से अर्पण की हुई अल्प वस्तु को भी भगवान सहर्ष स्वीकार करते हैं। पूजा में वस्तु का नहीं, भाव का महत्व है।

परंतु मानव जब इतनी भावावस्था में न रहकर विचारशील जागृत भूमिका पर होता है, तब भी उसे लगता है कि प्रभु पर केवल पत्र, पुष्प, फल या जल चढ़ाना सच्चा पूजन नहीं है। ये सभी तो सच्चे पूजन में क्या-क्या होना चाहिए, यह समझाने वाले प्रतीक हैं।

पत्र यानी पत्ता। भगवान भोग के नहीं, भाव के भूखे हैं। भगवान शिवजी बिल्व पत्र से प्रसन्न होते हैं, गणपति दूर्वा को स्नेह से स्वीकारते हैं और तुलसी नारायण-प्रिया हैं! अल्प मूल्य की वस्तुएं भी हृदयपूर्वक भगवद् चरणों में अर्पण की जाए तो वे अमूल्य बन जाती हैं। पूजा हृदयपूर्वक होनी चाहिए, ऐसा सूचित करने के लिए ही तो नागवल्ली के हृदयाकार पत्ते का पूजा सामग्री में समावेश नहीं किया गया होगा न!

पत्र यानी वेद-ज्ञान, ऐसा अर्थ तो गीताकार ने खुद ही 'छन्दांसि यस्य पर्णानि' कहकर किया है। भगवान को कुछ दिया जाए वह ज्ञानपूर्वक, समझपूर्वक या वेदशास्त्र की आज्ञानुसार दिया जाए, ऐसा यहां अपेक्षित है। संक्षेप में पूजन के पीछे का अपेक्षित मंत्र ध्यान में रखकर पूजन करना चाहिए। मंत्रशून्य पूजा केवल एक बाह्य यांत्रिक क्रिया बनी रहती है, जिसकी नीरसता ऊब निर्माण करके मानव को थका देती है। इतना ही नहीं, आगे चलकर इस पूजाकांड के लिए मानवके मन में एक प्रकार की अरुचि भी निर्माण होती है।

गेम्स सिस्टम रिक्वायरमेंट

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अजीबो गरीब जानकारी


दोस्तों आज में आपके लिए लाया हू इंटर नेट की दुनिया से कुछ ऐसी अजीबो गरीब जानकारी जिसे पढ़ कर आपको बहुत मजा आयेगा


आंसू बहाते हुए बच्चे की इस पेंटिंग के किस्से 1985 के करीब ब्रिटेन में काफी चर्चा में रहे। इस दौरान वहां कई घरों में आग लगने की घटनाएं घटी थीं। आश्चर्य की बात ये थी कि घरों में सबकुछ जल जाता था सिर्फ आंसू बहाते बच्चे की पेंटिंग बच जाती थी।

मतलब ये कि जहां ये पेंटिंग होती वहां आग लग जाती थी। यॉर्कशायर के एक फायरमैन ने सबसे पहले ‘द सन’ अखबार में ये बात कही थी। इसके बाद अखबार के दफ्तर में कई लोगों के इस तरह के फोन आए। बाद में अखबार वालों ने सभी लोगों से ये तस्वीर उनके दफ्तर में लाने को कहा और सभी को आग लगा दी गई।
इस तरह उन लोगों को इसकी बद्दुआ से निजात मिली। कई लोगों ने अपने घर में आग लगने का जिम्मेदार इस पेंटिंग को ठहराया। कई लोगों के घर वाले आग में मारे गए। फिर भी इस पेंटिंग में ऐसा क्या था, ये पेंटिंग किसने बनाई थी और ये बच्चे कौन था, ऐसे कई सवाल आज भी राज हैं।
रॉथेरहैम के फायर स्टेशन अधिकारी एलन विल्किनसन इस राय से सहमत नहीं थे। फिर भी उनकी पत्नी का कहना था कि बच्चे के आंसू ही पेंटिंग का जलने से बचाते थे। 1995 में डेवॉन के रिटायर्ड स्कूल मास्टर जॉर्ज मैलोरी ने पता लगाया कि ये पेंटिंग एक स्पेनिश कलाकार फ्रेंचॉट सेविले ने बनाई थी। उन्होंने डॉन बोनिलो नाम के इस बच्चे की पेंटिंग बनाई थी।
वह 1969 में उन्हें मेडरिड में भटकता हुआ मिला था। बच्चे के माता पिता आग में जल गए थे और वह बच गया था। जिस कैथलिक पादरी ने बच्चे को पहचाना था, उसने सेविले को उसे गोद लेने से मना किया था। फिर भी सेविले नहीं माने और एक दिन उनका स्टूडियो भी जल गया था। 1960-70 के दशक में बेहद पॉपुलर रही ये पेंटिंग 1985 के बाद किसी घर में नजर नहीं आई।

राज़ है गहरा
ब्रिटेन में आंसू बहाते हुए एक बच्चे की पेंटिंग काफी पॉपुलर हुआ करती थी। बाद में पता चला कि जिस घर में ये होती थी, वहां आग लग जाती। मगर, सबकुछ जलकर खाक हो जाने के बाद सिर्फ ये पेंटिंग बच जाती थी। इसके पीछे क्या कारण था ये आज तक कोई नहीं समझ सका है।

कुछ ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज में हाईटैक वाशिंग मशीनें रखी गई हैं जो कपड़े धुलने का चक्र पूरा होने पर इसका इस्तेमाल करने वाले को ईमेल कर देती हैं कि आकर कपड़े ले जाओ। इन डिजिटल मशीनों के निर्माताओं का कहना है कि छात्र जब धोने के लिए कपड़े ढोकर लाते हैं और सभी मशीनों को व्यस्त देखते हैं तो उन्हें बहुत निराशा होती है।


अब उन्हें ऐसी मायूसी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सबसे पहले लॉन्ड्रीव्यू मशीनें लीड्स यूनिवर्सिटी में इंस्टाल की गई थी। वहां के छात्र कपड़े धोने के लिए ले जाने से पहले एक वेबसाइट पर खोलकर देख लेते थे कि मशीनें खाली हैं या नहीं।


इसके बाद छात्र एक सामान्य मशीन की तरह उनमें कपड़े भर देते। बाद में कपड़े धुलने पर उठाए जाने के लिए उन्हें एक ईमेल मिलती थी। यह स्कीम इतनी सफल साबित हुई कि अब ऐसी मशीनें 28 यूनिवर्सिटियों में इंस्टाल की जा चुकी है।


इंग्लैंड का एक कॉलेज अपने अजीबोगरीब ऑफर के कारण छात्रों को असफल होने के लिए उकसाने की आलोचना झेल रहा है। दरअसल, कॉलेज ने फेल होने वाले छात्रों को पांच हजार पाउंड देने की बात कही है। अपनी बात में वजन डालते हुए कॉलेज प्रशासन ने कहा कि उनके छात्र फेल ही नहीं होते, यदि ऐसा हुआ तो वे पांच हजार पाउंड देने को तैयार हैं।

ब्लैकबर्न कॉलेज का दावा है कि 27 साल से कॉलेज की ‘ए’ लेवल परीक्षाओं का औसत रिजल्ट ए-ग्रेड में आ रहा है। यह ऑफर इसलिए भी दिया गया है कि कॉलेज छात्रों के लिए परीक्षाएं आसान होती जा रही हैं। कॉलेज के ऑफर की आलोचना करने वालों का कहना है पढ़ाई और परीक्षाओं का स्तर सुधारने के बजाए कॉलेज अपने छात्रों को फेल होने के लिए उकसा रहा है। यह तो लोगों के टैक्स का दुरुपयोग भी है।

कमजोर छात्रों को भीख है ये ऑफर

कॉलेज की नई स्कीम को नजरअंदाज कर 400 ए-लेवल छात्रों को ज्यादा मेहनत करनी चाहिए और यह समझना चाहिए कि ऐसा नहीं किया तो वे अगली परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे। रियल एजुकेशन कैंपेन चला रहे निक सीटन ने इस ऑफर की आलोचना करते हुए कहा कि यह तो ऐसे छात्रों के साथ खिलवाड़ है, जो बाउंड्री पर रहते हैं।

कमजोर छात्रों के लिए इस तरह के ऑफर भीख की तरह होंगे। टेक्सपेयर्स एसोसिएशन के फिओना मेकइवाय ने कहा कि यह उटपटांग ऑफर लोगों के टैक्स चुकाने का मजाक है, जो विषम परिस्थितियों से मुकाबला करने में सरकार के काम आना चाहिए। कॉलेज के एक होनहार छात्र स्टीफन एशवर्थ ने भी ऑफर से असहमति जताते हुए कहा कि यह ऑफर कुछ छात्रों को निश्चित रूप से पसंद आएगा, जो बाउंड्री पर पास होने के बजाए फेल होना ज्यादा पसंद करेंगे।


देश में पहली बार एक ऐसी टैक्सी आने वाली है जिसमें चालक (ड्राइवर) की जरुरत नही होने वाली है। इस गाड़ी से लोग सिर्फ दस रुपए में आधे घंटे का सफर 10 मिनट में तय कर सकेंगे। जी हां लंदन के बाद अब पहली बार दिल्ली से सटे गुड़गांव में ‘पॉड टैक्सी’ की शुरुआत होने वाली है। ये टैक्सी चार्जेबल बैटरी से चलती है। जो पूरी तरह से पर्यावरण के अनुरूप होगी।

इसके अंदर लगे टच स्क्रीन पर आपको अपनी मंजिल चुननी होगी और ‘पॉड टैक्सी’ आपको सबसे छोटे रास्ते से वहां पहुंचा देगी। यह किसी लिफ्ट को ऑपरेट करना जैसा आसान होता है। इस टैक्‍सी में 4 से 6 लोग एक साथ सफर कर सकते हैं। यानी अब आप ले सकते हैं ‘पॉइंट टू पॉइंट जर्नी’ का मजा।



एक घर को लूटने आए दो हथियारबंद लुटेरों पर जब एक महिला ने झाड़ू लेकर हमला कर दिया तो चोरों को सर पर पांव रखकर भाग निकलने के अलावा कुछ दिखाई नहीं दिया। पुलिस अधिकारी स्टीफन फॉक्स ने कहा कि यह लुटेरे घर की एक खिड़की तोड़कर अंदर घुसे थे।
उन्होंने कहा कि एक 49 वर्षीय व्यक्ति शोर सुनते ही सीढ़ियां उतरकर नीचे आया तो लुटेरों ने उसे बांध दिया। फिर उसका 90 वर्षीय पिता नीचे आया तो बंदूक की नोक पर लुटेरों ने उससे 50 डॉलर छीन लिए।
फिर जब वे सीढ़िया चढ़कर ऊपर जाने लगे तो उनका सामना 43 वर्षीय एक महिला से हुआ जो झाड़ू लेकर उनका इंतजार कर रही थी। उसके हाथ में झाड़ू और उसका रौद्र रूप देखकर लुटेरों के होश उड़ गए और उन्होंने वहां से चंपत होने में ही अपनी भलाई समझी

अब आपका पीसी आपका गुलाम होगा।



इस सॉफ्टवेयर की सहायता से  इंटरनेट अपने आप कनेक्ट हो जाता है, www.yahoo.com वेब साईट स्वत: ही खुल जाती है, लॉगिन करके स्वत: ही पहुंच जाता है सीधे इनबॉक्स पर, जहां आप नई ई-मेल रिसिव होते हुए देखते हैं, चौक गए ना !इस सॉफ्टवेयर की सहायता आप  अपने पीसी को बिना ऑपरेट करे उससे कुछ भी करवा सकते है। आपका पीसी आपका गुलाम होगा।
यह सब संभव हुआ एक युटिलिटी प्रोग्राम के द्वारा, जिसका नाम है ईज़ी मेक्रों रिकार्डर (Easy Macro Recorder)। इस युटिलिटी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर आप अपने कीबोर्ड और माउस के क्रियाकलापों को एक बार रिकार्ड करके चाहे जितनी बार उसे प्ले कर सकते है।
यह केवल तीन चरणों का कार्य है, रिकार्ड करों, सेव करो, और प्ले करो। इस तरह आप अपने कम्प्यूटर पर करने वाले नियमित कार्यों को स्वचालित करवा सकते है बस उन्हें एक बार रिकार्ड करना होता है, चाहे जितनी बार फिर उसे प्ले किया जा सकता है।
इसके द्वारा आप उन कार्यों को रिकार्ड कर सकते हैं जो आपको अपने पीसी पर बार - बार करने पड़ते है जो समय बर्बाद करते है तथा अधिक स्टेप वाले होते है.
Easy Macro Recorder आपके कम्प्यूटर के की बोर्ड एवं माउस के क्रियाकलापों को एक मेक्रों फाइल में सेव करके रखता है, तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे कितनी ही बार और किसी भी समय प्ले कर सकता है।


आप इस यूटिलिटी सॉफ्टवेयर को इंटरनेट पर यहा से डाउनलोड कर सकते है।


सॉफ्टवेयर को सफलतापूर्वक डाउनलोड कर लेने के बाद आप इसके सेटअप प्रोग्राम पर डबल क्लिक करके पीसी में इन्सटाल कर सकते है।
इन्सटालेशन पूरा होने के बाद आप ईजी मेक्रों रिकार्डर को Start -> Program - > Easy Macro Recorder पर क्लिक करके प्रारंभ कर सकते हैं। या डेस्कटॉप पर रखे ईज़ी मेक्रो रिकार्डर के आइकान पर डबल क्लिक करके प्रारंभ कर सकते है।
प्रोग्राम प्रारंभ होकर यह 'ट्रे आइकान' बन जाता है, 


ईज़ी मेक्रों रिकार्डर द्वारा रिकार्ड करना:
रिकार्डिंग को प्रारंभ करने के लिए सिस्टम ट्रे में रखे ईज़ी मेक्रों रिकार्डर के आइकन (Green Color Icon) पर राईट क्लिक करें।
एक पॉपअप मेनु खुलेगा जिसपर 'Record' विकल्प को चूने।
'Save Macro As' डायलॉग बॉक्स खुलेगा। जिसमें आप मेक्रों फाईल का कोई भी नया नाम टाइप करके 'Save' बटन को दबाए। रिकार्डिंग स्टार्ट हो जाएगी, आप जो भी प्रोग्राम या निर्देश रिकार्ड करना चाहते है वही कार्य कम्प्यूटर पर क्रम से करने लगें जैसा की हमेशा करते है।
Easy Macro Recorder आप के द्वारा किए गए सभी क्रिया कलापों को रिकार्ड कर लेगा।
जब रिकार्डिंग चल रही होगी उस समय Easy Macro Recorder का आइकन बदल जाएगा उसकी जगह 'R' चिन्ह दिखाई देगा, अर्थात मेक्रों रिकार्डर अभी रिकार्डिंग कर रहा है।
आपका कार्य पूर्ण हो जाए तो रिकार्डिंग को रोकने के लिए ट्रे आइकन पर राईट क्लिक करके 'Stop' विकल्प चूने।


शार्टकट : F9 रिकार्डिंग प्रारंभ करने के लिए
शार्टकट : F10 रिकार्डिंग को रोकने के लिए


ईज़ी मेक्रों रिकार्डर के द्वारा सेव किए गए मेक्रों को प्ले करना।


सेव किए गए मेक्रों को प्ले करने के लिए आप इज़ी मेक्रों रिकार्डर के आइकॉन पर राईट क्लिक करें- पॉपअप मेनु से 'Play back' विकल्प चूने।
'Select Macro File to Play back' डायलॉग बॉक्स आपके कम्प्यूटर की स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। अब फाइलों की सूची में से आप अपनी मेक्रों फाइल चून कर 'Open' बटन प्रेस करे।
मेक्रों प्ले होना प्रारंभ हो जाएगा और कम्प्यूटर वे सारे कार्य अपने आप करना प्रारंभ कर देगा जो आपने रिकार्ड किए है। इस दौरान ईज़ी मेक्रों रिकार्डर का आइकान बदल कर 'P' प्रदर्शित कर रहा है।
मेक्रों की प्लेबेक होने की प्रक्रिया को आप किसी भी समय 'F8' बटन दबा कर रोक सकते है।
इसी प्रकार आप अपने नियमित किए जाने वाले कार्य को स्वचालित कर सकते हैं।
और विभिन्न प्रकार के कार्यो के करने के लिए भिन्न - भिन्न मेक्रों बना सकते है।